tag:blogger.com,1999:blog-233940762008-05-08T07:27:50.672-07:00अभिरंजन कुमार का ब्लॉगabhiranjan kumarhttp://www.blogger.com/profile/07347580649235769822noreply@blogger.comBlogger2125tag:blogger.com,1999:blog-23394076.post-1141553800633883852006-03-05T02:14:00.000-08:002006-03-06T10:15:34.256-08:00<span style="font-size:130%;color:#33cc00;"><em><strong>बातें तुम्हारी प्रिये...</strong></em></span><br /><br />लहराती नदियों-सी होकर भी गहरी।<br />बातें तुम्हारी प्रिये क्यों ठहरी-ठहरी।<br /><br />मैं तो एक झरना हूँ, रुक जाऊँ कैसे?<br />छाती पे पत्थर की ठुक जाऊँ कैसे?<br />मीन-सी तड़प रही है मेरी प्रतीक्षा में<br />देखो तुम्हारी प्रिये एक-एक लहरी।<br /><br />मैं तो एक बादल हूँ, बाँहों में भर लो।<br />काजल समान प्रिये आँखों में धर लो।<br />ख़त्म नहीं होऊँगा किंतु तेरे अंबर से<br />बार-बार बरसूँगा संझा-दुपहरी।<br /><br />मन पे उदासी न छाने दो हमदम<br />आज मुझे रोको न, गाने दो हमदम<br />तेरे सितार भी जो उँगलियों से छेड़ दें<br />गीत लिखूँ या कि कोई कविता सुनहरी।<br /><br />छाँव तो धूप की छाया है प्रियतम<br />धूप संग पड़ते हैं छाँव के भी क़दम।<br />धूप को जो ओढ़ लो तो छाँव बिछ जाती<br />आँचल-सी फिरती है ज्यों फहरी-फहरी।<br /><br />लहराती नदियों-सी होकर भी गहरी।<br />बातें तुम्हारी प्रिये क्यों ठहरी-ठहरी।<br /><br />(1 मार्च, 2006)<br /><br />होम पेज पर लौटें: <a href="http://www.abhiranjankumar.com">www.abhiranjankumar.com</a>abhiranjan kumarhttp://www.blogger.com/profile/07347580649235769822noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23394076.post-1141447501116718372006-03-03T20:41:00.000-08:002006-03-03T21:17:32.946-08:00स्वागत दोस्त,<br />मेरे साहित्य और मेरी गतिविधियों की ताज़ा जानकारियाँ देने के लिए लंबे समय से हिन्दी में मेरी वेबसाइट <a href="http://www.abhiranjankumar.com">www.abhiranjankumar.com</a> मौजूद थी, लेकिन इसके यूनीकोड में नहीं होने की वजह से कई मित्रों और पाठकों ने बताया कि वो देवनागरी में अपनी प्रतिक्रिया नहीं भेज पा रहे। इसलिए जब तक मैं अपनी वेबसाइट को यूनीकोड में बदल लूँ, तब तक आप सब लोग यहाँ पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। साथ ही यहाँ आप मेरी ताज़ा रचनाएँ भी पढ़ सकेंगे और उन पर बेधड़क अपनी राय ज़ाहिर कर सकेंगे।<br />शुक्रिया<br />आपका<br />अभिरंजन कुमारabhiranjan kumarhttp://www.blogger.com/profile/07347580649235769822noreply@blogger.com